डिसिप्लिन के नाम पर बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ , रेलवे फाटक के कारण बच्चे हो रहे प्रताड़ित

डिसिप्लिन के नाम पर बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ , रेलवे फाटक के कारण बच्चे हो रहे प्रताड़ित

देर पहुंचने से पनिशमेंट के डर से तेज रफ्तार से वाहन चलाकर पहुंचते है बच्चे , दुर्घटना पर किसकी होगी जिम्मेदारी ?




खरसिया, श्री शंकराचार्य पब्लिक स्कूल वैसे तो एक बहुत अच्छा स्कूल माना जाता है , शिक्षा, खेलकूद , एक्टिविटीज को लेकर  इस स्कूल का बहुत अच्छा  खासा प्रदर्शन है  । परन्तु स्कूल प्रिंसिपल के कुछ दिन छुट्टी पर जाने से स्कूल का चार्ज  अरविंद केवर्ट को दिया गया है । जो स्कूल में डिसिप्लिन के नाम पर फाटक पार से आने वाले बच्चों के देरी होने पर उन्हें बाहर खड़ा कर ,स्कूल का गेट बंद कर उन्हें पनिशमेंट देते है उन्हें खरी खोटी सुनाकर अंदर लेते है परंतु जो बच्चे फाटक पार से नहीं आते उन्हें घर वापस भेज दिया जाता है ।

स्कूल में डिसिप्लिन अनिवार्य है समय की कद्र सिखाना भी शिक्षक की नैतिक जिम्मेदारी है परंतु रेलवे ओवरब्रिज न बन पाने की स्थिति में अक्सर बच्चे एक पल के लिए चूक जाते है और फाटक में घंटो खड़े रहने को मजबूर होते है , कुछ बच्चे किसी तरह समय से पहले पहुंच जाते है परंतु कुछ बच्चों को पहुंचते ही फाटक बंद हो जाता है , समय पर पहुंचना हर बच्चा चाहता है पर ऐसे विकराल समस्या के आगे सब हार मान चुके है और उनके पास सिवा इंतेज़ार के कुछ नहीं रह जाता ऐसे में बच्चो का लेट होना स्वाभाविक है । और इस पर फाटक में इतना मानसिक रूप से परेशान होने के बाद स्कूल में भी टीचर अरविंद केवर्ट के द्वारा सवाल जवाब करना ,बच्चों को खड़ा कर के उन्हें डांटना या सजा देना बच्चो को प्रताड़ित करना है।

पेरेंट्स के द्वारा भी निवेदन किया गया कि फाटक के कारण  कितनी भी देरी हो जाती है क्योंकि कभी ट्रेन आधा घंटा कभी ४० मिनिट कभी उससे भी अधिक समय तक खड़ी रहती है जिसमें खरसिया की पूरी जनता को परेशान कर रखा है ।

बच्चो में समय पर स्कूल पहुंचना वक्त का पाबंद होना अनिवार्य है परंतु समस्या अगर मार्ग में आ रही रुकावट की हो तो उस समस्या के समाधान के बगैर बच्चो को प्रताड़ित करना अनुचित है ।


बच्चे स्कूल देरी के डर से सजा के डर से तेज वाहन चलाते है जिससे कभी भी कोई भी दुर्घटना घटित हो सकती है ऐसे में बच्चो की जान से खिलवाड़ कहां तक उचित है ?

शिक्षकों को भी चाहिए के बच्चो की उनके अभिभावकों की परेशानियों को समझें और उनका सहयोग करें न कि बच्चों को प्रताड़ित कर उनके  अभिभावकों से बहस ।

प्रशासन और शिक्षा विभाग से विनम्र निवेदन है रेलवे फाटक से आने वाले बच्चों को समय के लिए ,फाटक के कारण देर से पहुंचने के लिए उक्त शिक्षक द्वारा  प्रताड़ित करना बंद कराया जाए एवं उचित कार्यवाही कर समस्या का निराकरण किया जाए ।

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