1928 से बसा आशियाना… अब एक सवाल – इन परिवारों का घर कहाँ होगा
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना परिसर से आज जो तस्वीर सामने आ रही है…वो सिर्फ एक खबर नहीं… बल्कि एक सदी से जुड़ी यादों, संघर्ष और भावनाओं की कहानी है…यह वही थाना परिसर है…जिसकी शुरुआत साल 1928 से मानी जाती है…करीब 100 साल… एक पूरा इतिहास…प्रशासनिक स्तर पर यह जमीन थाना उपयोग के लिए दी गई थी…और तभी से यहाँ सिर्फ पुलिसकर्मी ही नहीं…बल्कि उनके परिवार भी पीढ़ी दर पीढ़ी बसते आए हैं…
इन दीवारों ने बचपन को जवान होते देखा है…इन आंगनों में बच्चों की हंसी गूंजी है…और इन्हीं छतों के नीचे रहकर… पुलिसकर्मियों ने दिन-रात समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई है
लेकिन अब…प्रस्तावित न्यायालय भवन निर्माण को लेकर चल रही प्रक्रिया ने इस पूरे माहौल को बदल दिया है…
एक तरफ न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने की पहल है…तो दूसरी तरफ…वही परिवार हैं… जो सालों से इस जगह को अपना घर मानते आए हैं…आज हालात ऐसे हैं कि…छोटे-छोटे बच्चे… महिलाएं…तेज धूप में निकल पड़े हैं…एसपी कार्यालय की ओर…
हाथ में आवेदन है…आंखों में उम्मीद है…और दिल में एक ही सवाल —“अगर हमें यहाँ से जाना पड़ा… तो हम कहाँ जाएंगे?”
ये वही परिवार हैं…जो हर दिन हमारी और आपकी सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं…जो हर त्योहार, हर संकट में… अपने परिवार से ज्यादा समाज को प्राथमिकता देते हैं…लेकिन आज…वही परिवार खुद असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच खड़े नजर आ रहे हैं…




करीब एक सदी से जिस जगह को उन्होंने अपना घर कहा…आज उसी से जुड़ी अनिश्चितता उन्हें अंदर तक झकझोर रही है…पुलिस परिवारों की बस एक ही मांग है…कि किसी भी निर्णय से पहले…उनके लिए स्पष्ट, सुरक्षित और सम्मानजनक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए…ताकि न सिर्फ उनका जीवन प्रभावित न हो…बल्कि उनके बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके…
अब यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं रह गया है…यह मामला है —न्याय और इंसानियत के बीच संतुलन का…क्योंकि…जो लोग हमेशा दूसरों की सुरक्षा में खड़े रहते हैं…आज वही अपने ही घर के लिए सवालों के बीच खड़े हैं…









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