न दो सम्मान चाहे तुम,
हिफाजत खास रखते हैं,
हम ख़ाकी वाले है साहब
वतन की लाज रखते हैं।
बहुत आसान होता है,
हम पे उँगली उठा देना,
सौ बातें ताने सुन कर भी
दया का भाव रखते हैं।
हम खाकी वाले हैं साहब
वतन की लाज रखते हैं।
न खेली है कभी होली
होली की छुट्टियों पर
दीवाली पर भी बस
अरमानो के दीपक ही जलाए हैं।
रहे महफ़ूज मेरा मुल्क
हम दिल में आस रखते हैं
हम ख़ाकी वाले हैं साहब
वतन की लाज रखते हैं।
लेख विशाल कुजूर ( इंस्पेक्टर रायपुर )

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