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एक अकेली माँ की दुनिया
वो सिर्फ माँ नहीं है—वो पिता भी है, दोस्त भी है, सहारा भी है। एक अकेली माँ के चेहरे की मुस्कान के पीछे कितनी अनकही थकान छिपी होती है, ये कोई नहीं जानता। दिन हो या रात, उसकी ज़िम्मेदारियाँ कभी खत्म नहीं होतीं।
वो अपने आँसुओं को तकिये में छिपाकर, हर सुबह बच्चों के लिए एक नई हिम्मत लेकर उठती है। वो खुद टूटकर भी बच्चों के लिए मज़बूत बनी रहती है। ज़िन्दगी की हर मुश्किल को वो अकेले सहती है, ताकि उसका बच्चा एक बेहतर कल देख सके।
वो बैंक की लाइन में भी खड़ी होती है, स्कूल की मीटिंग में भी जाती है, घर का हर खर्च संभालती है और बच्चों के सपनों को भी उड़ान देती है। न कोई कंधा होता है उस पर सिर रखने को, न कोई शाम होती है सुकून की—but फिर भी, वो कभी हार नहीं मानती।
एक अकेली माँ अकेली ज़रूर होती है, लेकिन कमज़ोर कभी नहीं। उसकी ममता में शक्ति है, उसकी चुप्पी में त्याग है, और उसकी आँखों में वो सपना है—जो हर दर्द को पार करके भी मुस्कुराना जानती है।
मदर्स डे पर उस हर सिंगल मदर को नमन—जो खुद अधूरी होकर भी अपने बच्चों की ज़िन्दगी को पूरा करती है।
पूजा जायसवाल
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