ओम प्रकाश जी के जीवन को समर्पित एक भावपूर्ण कविता)

“संघर्ष से शिखर तक-ओ•पी•

(ओम प्रकाश जी के जीवन को समर्पित एक भावपूर्ण कविता)

जब स्वार्थों से जूझ रही थी राजनीति की चाल,
तब जन्मा एक व्यक्तित्व-संकल्पों का लाल।
न पद का लोभ, न सत्ता का स्वप्न,
बस एक ध्येय-हो जनहित में अपना यत्न।

प्रशासन की ऊँचाइयों को जब छुआ,
तब भी जमीन से नाता न टूटा,
साफ नीयत, सरल वाणी, दृढ़ विचार,
बना दिया खुद को जनसेवा का आधार।

छोड़ा सिंहासन, नहीं देखी पीछे राह,
जब बुलाया जनता ने-अशोक चल पड़ा वहां।
ना नारों से राजनीति की माया गढ़ी,
बल्कि नीति से, मर्यादा से तस्वीरें गढ़ीं।

आज जब छत्तीसगढ़ की अर्थनीति सँवरे,
तो पीछे खड़े दिखें-वही अशोक हमारे।
बजट में दिखे किसान, गरीब और जवान,
हर अंक में हो सेवा का निर्मल गान।

जनता कहे-“यह नेता नहीं, एक तपस्वी है,”
“जो कुर्सी को नहीं, कर्म को आराधना माने सही है।”
हाथ जोड़ कर जन्मदिन पर ये ही अरदास,
ईश्वर दे आपको और ऊँचाइयों का प्रकाश।

आपके जन्मदिन पर आपको अनंत शुभकामनाएँ और बधाई आपका जीवन यशस्वी,स्वस्थ और लोकसेवा से सदा जुड़ा रहे।

-पंडित कान्हा शास्त्री
(ज्योतिर्विद-लेखक एवम् सामाजिक विश्लेषक)

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