क्यों संविधान की हत्या दिवस मनाया गया ??


आज खरसिया में संविधान हत्या दिवस के रूप में नगर मंडल द्वारा पुरानी बस्ती राठौर भवन मे चौपाल सभा आयोजीत की गई जिसमे मुख्य वक्ता के रुप मे खरसिया नगर पालिका के अध्यक्ष कमल गर्ग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर मंडल अध्यक्ष विजय शर्मा द्वारा की गई तथा नगरपालिका उपाध्यक्ष बंटी सोनी, पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष सतीश अग्रवाल पार्षदगण ललित राठौर, राधे राठौर, विनोद सिदार, पतालू चौहान, अरुण चौधरी, साहिल शर्मा चीनू, जनपद सदस्य लक्ष्मी पटेल,पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष कैलाश जायसवाल,उमाशंकर शर्मा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष सरिता सहिस,गायत्री केशरवानी,किरण राठौर,वरिष्ठ भाजपा नेता दिलेश्वर राठौर, संतोष राठौर,डोरीलाल राठौर,रतन राठौर, योगेंद्र पाण्डेय, राकेश धृतलहरे, अनीस परवेज़,सौरभ अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, हर्ष अग्रवाल सहित आमजन उपस्थित रहे।

मुख्य कारण

इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की थी। यह निर्णय कई कारणों से लिया गया था, जिनमें राजनीतिक, कानूनी और व्यक्तिगत कारण शामिल थे। नीचे मुख्य कारण दिए गए हैं:

🔴 आपातकाल लगाने के मुख्य कारण:

1. इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला (12 जून 1975)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के 1971 के लोकसभा चुनाव को गैरकानूनी घोषित कर दिया था।

उन पर चुनावी भ्रष्टाचार (misuse of government machinery) का आरोप सिद्ध हुआ।

कोर्ट ने उन्हें 6 साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया।


2. राजनीतिक विरोध और आंदोलन

जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन) ने इंदिरा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप में देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया था।

छात्र, युवा, मजदूर, विपक्षी दल—सभी सड़कों पर थे।

देश भर में हड़तालें, रैलियां और उग्र प्रदर्शन हो रहे थे।


3. आंतरिक सुरक्षा और अस्थिरता का हवाला

इंदिरा गांधी ने कहा कि देश में “आंतरिक गड़बड़ी” बढ़ रही है और इससे राष्ट्र की एकता और अखंडता को खतरा है।

उन्होंने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा करवाई।


4. अपनी सत्ता बचाने का प्रयास

कोर्ट का निर्णय और जनआंदोलन से इंदिरा गांधी की सत्ता खतरे में थी।

इसलिए उन्होंने लोकतंत्र को दरकिनार करते हुए तानाशाही रास्ता अपनाया।





🛑 आपातकाल में क्या-क्या हुआ?

मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए

प्रेस सेंसरशिप लागू हुई

विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया

सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका पर दबाव बढ़ा

संजय गांधी द्वारा जबरदस्ती नसबंदी अभियान चलाया गया


⚖️ निष्कर्ष:

आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है। यह एक ऐसा समय था जब संविधान, जनता की आवाज़ और आज़ादी को दबा दिया गया। इंदिरा गांधी ने इसे “देश की सुरक्षा” के नाम पर लगाया, लेकिन असल में यह उनकी कुर्सी बचाने की कोशिश थी

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