शांति और आस्था का प्रतीक ग्राम गिंडोला जैतखाम

🌿 *शांति और आस्था का प्रतीक ग्राम गिंडोला जैतखाम*
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*जिला प्रवक्ता राकेश नारायण बंजारे ने किया जैतखाम स्थल का दर्शन*

रायगढ़ | तहसील खरसिया अंतर्गत ग्राम गिंडोला के सघन वन क्षेत्र में स्थापित जैतखाम पिछले पच्चीस वर्षों से सतनामी समाज की आस्था, साधना और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है।


वर्तमान में वन विभाग द्वारा कुछ दिशा-निर्देश दिए गए हैं जिन पर संत समाज और ग्रामवासियों के सामूहिक विचार-विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


 इसी संदर्भ में भंते अश्विनी जी के आमंत्रण पर प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के जिला प्रवक्ता राकेश नारायण बंजारे का ग्राम गिंडोला आगमन हुआ। उन्होंने वन क्षेत्र में स्थित पवित्र जैतखाम स्थल का दर्शन किया और भंते अश्विनी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

दर्शन के पश्चात श्री बंजारे ने स्थल की प्राकृतिक सुंदरता व शांत परिवेश की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यह स्थल बाबा गुरु घासीदास जी के विचारों का जीवंत रूप है। यहां की हरियाली, शांति और श्रद्धाभाव आत्मा को भीतर तक स्पर्श करता है।


     उन्होंने यह भी कहा कि बाबा शान्तु राम सतनामी द्वारा वर्ष 2003 में स्थापित इस जैतखाम स्थल को संरक्षित और सुव्यवस्थित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही आश्वस्त किया कि वन विभाग के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए यहां की धरोहर, पर्यावरण और आध्यात्मिकता को सुरक्षित रखा जाएगा।


    भंते अश्विनी जी ने जानकारी दी कि यह स्थल विगत दो दशकों से श्रद्धा, भक्ति और साधना का केंद्र बना हुआ है जहां प्रतिवर्ष गुरु घासीदास जयंती सहित अन्य महत्वपूर्ण आयोजन भी संपन्न होते हैं। वर्तमान में वन विभाग द्वारा आसपास पौधारोपण सहित कुछ आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं जिन पर समाजजनों का सामूहिक चिंतन आवश्यक है ताकि यह अमूल्य आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित रह सके और भावी पीढ़ियों तक ससम्मान पहुंचे।


     इसी क्रम में एक आवश्यक बैठक जैतखाम स्थल, ग्राम गिंडोला में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया जिसमें सभी संत समाज के प्रतिनिधियों, ग्रामवासियों एवं समाजबंधुओं से उक्त बैठक में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराने और समाजहित में सुझाव, सहयोग व सामूहिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदार बनने की बात कही गई।

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