सैकड़ों हस्ताक्षर के साथ सीएम साय के नाम सौंपा गया ज्ञापन

सैकड़ों हस्ताक्षर के साथ सीएम साय के नाम सौंपा गया ज्ञापन

खरसिया में ओवरब्रिज निर्माण की मांग ने पकड़ा जोर

खरसिया, 01 अगस्त 2025 – खरसिया के नागरिकों ने वर्षों से लंबित ओवरब्रिज निर्माण को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दे दिया है। शुक्रवार को नगर के सभी 18 वार्डों के सैकड़ों लोगों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपते हुए रेलवे फाटक क्रमांक 313 पर स्वीकृत ओवरब्रिज का कार्य तत्काल शुरू करने की मांग की।

ज्ञापन सौंपते समय नागरिकों का साफ कहना था कि यह मांग किसी एक क्षेत्र या वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे शहर की है। लोग अब धैर्य की सीमा तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो खरसिया की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि खरसिया विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल के प्रयासों से 23 दिसंबर 2021 को ओवरब्रिज को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी थी। कोरोना काल के बावजूद सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं और निविदा प्रक्रिया भी शुरू हुई। हालांकि तकनीकी कारणों से दो बार निविदा निरस्त हुई और तीसरी बार फाइनल होने के बाद आचार संहिता लागू हो गई, जिससे अनुबंध और कार्यादेश जारी नहीं हो सका। लेकिन नई सरकार के गठन के बाद भी कार्य प्रारंभ न होना नागरिकों के लिए चिंता और असंतोष का विषय बन गया है।स्थानीय लोगों ने बताया कि रेलवे फाटक से प्रतिदिन 40 से 45 ट्रेनें गुजरती हैं, जिससे अक्सर आधे घंटे या उससे अधिक समय तक फाटक बंद रहता है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं, न्यायालयीन कार्य से जुड़े लोगों और आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह भी बताया गया कि लगभग सात करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है और स्थल निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार है।

ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा गया – “हमें ओवरब्रिज चाहिए, अंडरब्रिज नहीं!” नागरिकों ने इसे सरकार द्वारा बरती जा रही “राजनीतिक उपेक्षा” करार दिया और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कार्य में और देर न करते हुए तुरंत निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।ज्ञापन की खास बात यह रही कि इसमें खरसिया के सभी 18 वार्डों के नागरिकों ने अपने हस्ताक्षर के साथ भागीदारी की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अब यह मुद्दा केवल विकास की आवश्यकता नहीं, बल्कि जनभावनाओं का प्रतिनिधि बन चुका है। सरकार के लिए इस सामूहिक आवाज को अनदेखा करना आसान नहीं होगा।

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