🔥 बरौद-बिजारी खदान में उग्र जनआंदोलन: उस्मान बेग के नेतृत्व में 6 घंटे ठप रहा कोयला उत्पादन 🔥
एसईसीएल के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, 30 दिन में समाधान का वादा — उस्मान बेग बोले, “यह आख़िरी अल्टीमेटम है!
रायगढ़। जिले के घरघोड़ा ब्लॉक स्थित एसईसीएल बरौद-बिजारी कोयला खदान सोमवार को दिनभर उथल-पुथल का केंद्र बना रहा। सुबह से ही युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण खदान के मुख्य द्वार पर पहुंच गए और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ ज़ोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।प्रदर्शनकारियों में खदान प्रभावित गांवों के लोग शामिल थे, जिन्होंने आरोप लगाया कि एसईसीएल पिछले कई वर्षों से अरबों रुपये की रॉयल्टी और डीएमएफ की राशि सरकार को दे रही है, लेकिन खदान से सटे गांव अब भी बिजली, पानी, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।ग्रामीणों का कहना था कि सीएसआर योजनाओं का लाभ केवल जिला मुख्यालय तक सीमित है, जबकि खदान क्षेत्र के गांव विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं। यही नहीं, कंपनी द्वारा वादा किए गए रोजगार और मुआवजे को लेकर भी लोगों ने गहरा असंतोष जताया।लगातार छह घंटे तक खदान का कार्य पूरी तरह ठप रहा, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
“एसईसीएल का विकास कागज़ों पर, ज़मीन पर नहीं” — उस्मान बेग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग ने कहा कि “एसईसीएल का विकास केवल कागज़ों पर दिखाया गया है, ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।”उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने प्रभावित ग्रामीणों को वर्षों से सिर्फ़ आश्वासन और रिपोर्टों में झूठे वादे दिए हैं।उन्होंने आगे कहा, “हम अब अपने हक के लिए सड़कों पर उतर चुके हैं। अगर सरकार और कंपनी ने जल्द सुनवाई नहीं की, तो आंदोलन जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा।”
⚖️ प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन — 30 दिनों में होगा समाधान लगातार बढ़ते जनआक्रोश के बीच प्रशासनिक अधिकारी और एसईसीएल प्रबंधन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। लंबी वार्ता के बाद उन्होंने 30 दिनों के भीतर सभी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया।इस आश्वासन के बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह सिर्फ़ “पहला चरण” है।
🚨 “30 दिन बाद होगा एसईसीएल जीएम ऑफिस का घेराव”
युवा कांग्रेस नेता उस्मान बेग ने कहा कि “यह 30 दिन का अल्टीमेटम है। अगर मांगे पूरी नहीं हुईं, तो अगला आंदोलन रायगढ़ स्थित एसईसीएल जीएम ऑफिस के सामने होगा — पहले से भी ज़्यादा उग्र तरीके से।”प्रदर्शन के बाद भी ग्रामीणों में ग़ुस्सा कायम है। स्थानीयों का कहना है कि वर्षों से वादे सुन-सुनकर सब्र का बांध टूट चुका है, और अब अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह विरोध जिलेव्यापी जनांदोलन का रूप ले सकता है।
📍 निचोड़:
बरौद-बिजारी खदान का यह आंदोलन सिर्फ एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि उन तमाम गांवों की आवाज़ है जो विकास के वादों के बीच उपेक्षित रह गए हैं। अब सबकी निगाहें अगले 30 दिनों पर टिकी हैं
क्या एसईसीएल अपने वादे निभाएगा, या फिर उस्मान बेग की अगुवाई में एक नया जनसंग्राम खड़ा होगा ?


















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