जनता की जीत: पुरुंगा कोल माइंस जनसुनवाई स्थगित — ग्रामीणों के संघर्ष ने रंग लाया, विधायक उमेश पटेल और लालजीत सिंह राठिया के समर्थन से मिली राहत
रायगढ़।रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से विरोध झेल रही अंबुजा सीमेंट की पुरुंगा अंडरग्राउंड कोल माइंस परियोजना की जनसुनवाई को आखिरकार स्थगित कर दिया गया है।छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, नया रायपुर द्वारा जारी सूचना के अनुसार, 11 नवंबर 2025 को निर्धारित यह जनसुनवाई आवेदक के अनुरोध पर आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है।
👉 यह वही जनसुनवाई थी जिसका ग्रामीणों ने शुरू से विरोध किया था।ग्राम पुरुंगा, कोडकर और समरसिंघा के सैकड़ों ग्रामीण कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिनका कहना था कि इस परियोजना से उनका पर्यावरण, जल स्रोत, खेती-किसानी और आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।ग्रामीणों के इस संघर्ष में धरमजयगढ़ के विधायक उमेश पटेल और लैलूंगा विधायक लालजीत सिंह राठिया ने खुलकर साथ दिया। दोनों विधायकों ने न केवल जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उन्हें समर्थन दिया बल्कि शासन-प्रशासन से परियोजना पर पुनर्विचार की मांग भी रखी।
विधायक उमेश पटेल ने कहा — “यह ग्रामीणों की जीत है, जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। पुरुंगा, कोडकर और आसपास के गांवों के लोगों ने पर्यावरण और जीवन के सवाल पर जो एकजुटता दिखाई है, वह सराहनीय है।”
वहीं विधायक लालजीत सिंह राठिया ने भी कहा — “हम अपने क्षेत्र के किसी भी गांव को उजड़ने नहीं देंगे। यह धरती हमारी मां है, इसे बचाने के लिए जो भी करना पड़े, करेंगे।”
जनसुनवाई स्थगित होने के बाद पूरे इलाके में खुशी और राहत का माहौल है। ग्रामीणों ने इसे “जनता की जीत” बताया और कहा कि यह निर्णय उनके लम्बे संघर्ष और एकता का परिणाम है।स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले कई हफ्तों से लगातार बैठकों, धरनों और विरोध रैलियों के माध्यम से अपनी बात उठा रहे थे। गर्मी, बारिश और सरकारी दबाव के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी।
गौरतलब है कि प्रस्तावित पुरुंगा अंडरग्राउंड कोल माइन (869.025 हेक्टेयर क्षेत्र) की उत्पादन क्षमता 2.25 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। यह खदान एम्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड द्वारा कोडकर, पुरुंगा और समरसिंघा गांवों में स्थापित की जानी थी।
🌱 अब यह सुनवाई स्थगित होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।जनता के सहयोग, विधायकों के समर्थन और ग्रामीणों की एकजुटता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब जनता संगठित होती है, तो हर बड़ी ताकत झुक जाती है।


रायगढ़ की धरती ने फिर दिखाया कि संघर्ष और एकता से ही जीत लिखी जाती है।













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