“चालान से नहीं, ज़िंदगी से जुड़ा है हेलमेट” — डोंगर गांव में पुलिस का सशक्त जागरूकता अभियान
डोंगर गांव, राजनांदगांव।
सड़क पर चलती हर बाइक, हर स्कूटी और हर दो-पहिया वाहन महज़ एक साधन नहीं, बल्कि किसी की पूरी ज़िंदगी और किसी परिवार की उम्मीदों को ढोता है। एक छोटी-सी लापरवाही, एक बिना हेलमेट की सवारी, पल भर में खुशियों को मातम में बदल सकती है। इसी कड़वी सच्चाई को लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से डोंगर गांव में Helmet Awareness Campaign चलाया गया।
यह अभियान पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के स्पष्ट दिशा-निर्देशों में और डोंगर गांव थाना प्रभारी इंस्पेक्टर आशीर्वाद राहटगांवकर के नेतृत्व में आयोजित किया गया।
डोंगर गांव में चला यह अभियान एक साफ संदेश देता है
हेलमेट पहनिए, ताकि आपकी तस्वीर किसी फ्रेम में मुस्कान के साथ रहे, हार के साथ नहीं।
अभियान के तहत गांव के प्रमुख रोड चौराहों, बाजार क्षेत्र और व्यस्त मार्गों पर बड़े-बड़े जागरूकता बैनर लगाए गए, ताकि हर गुजरने वाला दो-पहिया चालक इन्हें देखे और एक पल रुककर सोचे।
इन बैनरों पर लिखे संदेश सीधे दिल को छूने वाले हैं—
“आपकी फोटो में हार नहीं चाहते, तो हेलमेट पहनें।”
यह पंक्ति केवल शब्द नहीं, बल्कि हर उस परिवार की पीड़ा को दर्शाती है, जिसने सड़क हादसों में अपनों को खोया है। पुलिस का मानना है कि अक्सर लोग हेलमेट को चालान से जोड़कर देखते हैं, जबकि हकीकत यह है कि हेलमेट चालान से नहीं, बल्कि मौत से बचाने वाला सुरक्षा कवच है।
अभियान के दौरान यह भी बताया गया कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर पर गंभीर चोट मौत का सबसे बड़ा कारण बनती है। सही तरीके से पहना गया हेलमेट कई मामलों में इंसान को मौत के मुंह से वापस खींच लाता है। बावजूद इसके, लापरवाही और जल्दबाज़ी के कारण लोग आज भी बिना हेलमेट सड़क पर निकल जाते हैं।
पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे हेलमेट को मजबूरी नहीं, बल्कि अपनी आदत बनाएं। घर से निकलते समय जिस तरह मोबाइल या चाबी ज़रूरी होती है, उसी तरह हेलमेट भी ज़रूरी होना चाहिए क्योंकि नियम तोड़ने पर चालान कट सकता है, लेकिन हादसे के बाद ज़िंदगी को दोबारा नहीं खरीदा जा सकता।
















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