मिट्टी के गणेश को बढ़ावा मिले, पीओपी की मूर्तियों पर लगे प्रतिबंध
गणेश चतुर्थी आस्था, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। ऐसे में यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि उत्सव का स्वरूप पर्यावरण के अनुकूल हो। जिला प्रशासन से विनम्र आग्रह है कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी गणेश प्रतिमाओं के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रभावी प्रतिबंध लगाया जाए तथा केवल मिट्टी से बनी पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया जाए।
पीओपी की मूर्तियां विसर्जन के बाद लंबे समय तक जल में नहीं घुलतीं, जिससे नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ता है। वहीं मिट्टी की प्रतिमाएं प्राकृतिक रूप से जल में विलीन हो जाती हैं और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचातीं।
इसके साथ ही, मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देना हजारों पारंपरिक कुम्हार परिवारों के पुश्तैनी रोजगार को भी संबल देगा। स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कला को सम्मान मिलेगा तथा स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण, दोनों को मजबूती मिलेगी।
आस्था और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए समय की मांग है कि हम सभी मिलकर मिट्टी के गणेश अपनाएं, स्थानीय कुम्हारों का समर्थन करें और जिला प्रशासन भी इस दिशा में ठोस कदम उठाकर पीओपी की मूर्तियों पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करे।
“मिट्टी के गणेश अपनाइए, पर्यावरण बचाइए और कुम्हारों की आजीविका को मजबूत बनाइए।”

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