ऑपरेशन ‘सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4’ का शुभारंभ, छत्तीसगढ़ की मिट्टी और राखियां पहुंचेंगी देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक

रायपुर। पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” एवं पूर्व सैनिक महासभा द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन सिपाही रक्षा-सूत्र 0.4 वर्ष 2026‘ का शुभारंभ हो गया है। इस अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पवित्र मिट्टी, राखी और प्रदेश के बच्चों व नागरिकों के स्नेह संदेश देश की सीमाओं पर तैनात भारतीय सैनिकों तक निशुल्क पहुंचाए जाएंगे। अभियान के संयोजक एवं पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में इस अभियान के माध्यम से 27 लाख 92 हजार भारतीय सैनिकों तक छत्तीसगढ़ की मिट्टी से तिलक और रक्षा-सूत्र पहुंचाए जा चुके हैं। यह अभियान पिछले वर्षों से लगातार संचालित हो रहा है।

इस वर्ष अभियान के संरक्षक के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, डॉ. विनोद तिवारी एवं महेंद्र जैन जुड़े हैं। वहीं केंद्र स्तर पर अभियान का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री तोखन साहू करेंगे। अभियान की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा कर रहे हैं।
अभियान की कार्यसमिति की प्रभारी महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े हैं। उनके साथ श्रीमती विभा अवस्थी, पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” के महिला प्रकोष्ठ “सिपाही शक्ति” की सभी वीरांगनाएं, विभिन्न महिला संगठनों की पदाधिकारी तथा प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

संगठन के प्रधान संरक्षक परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव एवं परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह हैं।ऐसे तैयार होता है ‘सिपाही रक्षा-सूत्र’अभियान के तहत स्कूली बच्चे, महिलाएं और आम नागरिक एक साधारण लिफाफे में अपने आंगन की एक चुटकी मिट्टी, एक राखी तथा भारतीय सैनिकों के नाम एक भावनात्मक पत्र रखते हैं।

पत्र में वे लिखते हैं कि “भैया, आप हमारी और हमारे देश की रक्षा करते हैं। रक्षाबंधन पर यह सिपाही रक्षा-सूत्र अपने हाथ में बांधकर देश की रक्षा करते रहिए।” कई लोग अपने पते और मोबाइल नंबर भी पत्र में लिखते हैं, जिनका जवाब सैनिक सीमाओं से भेजते हैं।इन लिफाफों को स्कूलों, सामाजिक संगठनों, महिला समूहों और स्वयंसेवकों द्वारा एकत्र किया जाता है। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी तथा संबंधित विभागों के माध्यम से इन्हें संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। वहां से पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” एवं पूर्व सैनिक महासभा इन्हें सड़क मार्ग से निशुल्क सेना मुख्यालय तक पहुंचाते हैं।

हर वर्ष सेना मुख्यालय में भारतीय सेना द्वारा इस अभियान का भव्य स्वागत किया जाता है। इस वर्ष रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तथा तीनों सेनाओं के प्रमुखों की उपस्थिति में अभियान के स्वागत का प्रस्ताव है।

स्कूल, स्काउट-गाइड और महिला समूहों से जुड़ने की अपील अभियान से जुड़ने के लिए सभी स्कूलों से अपने-अपने जिला शिक्षा अधिकारी, स्काउट-गाइड से अपने जिला प्रमुख तथा महिला समूहों से महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला परियोजना अधिकारी के माध्यम से संपर्क करने की अपील की गई है।

छत्तीसगढ़ यात्रा एवं संग्रहण कार्यक्रम3 अगस्त 2026 दंतेवाड़ा (मां दंतेश्वरी मंदिर) से अभियान का शुभारंभ एवं संग्रहण जगदलपुर संग्रहण कोंडागांव आगमन एवं रात्रि विश्राम 4 अगस्त 2026 कोंडागांव संग्रहण कांकेर संग्रहण राजिम संग्रहण रायपुर आगमन एवं रात्रि विश्राम 5 अगस्त 2026 रायपुर संग्रहण दुर्ग-भिलाई संग्रहण राजनांदगांव आगमन एवं रात्रि विश्राम 6 अगस्त 2026राजनांदगांव संग्रहण खैरागढ़ संग्रहण 7 अगस्त 2026 बेमेतरा आगमन एवं संग्रहण कवर्धा संग्रहण लोरमी संग्रहण तखतपुर संग्रहण 10 अगस्त 2026 अकलतरा संग्रहण जांजगीर संग्रहण खरसिया संग्रहण रायगढ़ आगमन एवं रात्रि विश्राम 11 अगस्त 2026 रायगढ़ संग्रहण सक्ती संग्रहण चांपा संग्रहण कोरबा संग्रहण एवं रात्रि विश्राम12 अगस्त 2026 पाली-रतनपुर संग्रहण 15 अगस्त 2026 बिलासपुर में जनप्रतिनिधियों एवं सैनिकों के साथ भव्य शोभायात्रा के बाद राष्ट्रीय यात्रा का शुभारंभ।

राष्ट्रीय यात्रा कार्यक्रम 15 अगस्त – अंबिकापुर आगमन एवं रात्रि विश्राम 16 अगस्त – अंबिकापुर संग्रहण, रांची आगमन 17 अगस्त – रांची संग्रहण, वाराणसी आगमन 18 अगस्त – वाराणसी दर्शन व संग्रहण, अयोध्या आगमन 19 अगस्त – श्रीराम जन्मभूमि दर्शन एवं संग्रहण, लखनऊ आगमन 20 अगस्त – लखनऊ संग्रहण, आगरा आगमन 21 अगस्त – आगरा संग्रहण, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा आगमन 22 अगस्त – मथुरा दर्शन एवं संग्रहण, नई दिल्ली आगमन।

महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने कहा कि यह अभियान केवल राखी भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों और सीमाओं पर तैनात सैनिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का एक राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूलों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने की अपील की।




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