क्यों मनाया जाता है आंवला नवमी का पर्व

आज है आंवला नवमी का पर्व

मान्यता है कि कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवले के पेड़ से अमृत की बूंदे गिरती हैं। इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है और स्वंय भी परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भोजन किया जाता है। आंवला नवमी के दिन  दान करना भी महत्वपूर्ण माना गया है
मान्यता है कि श्री हरि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक आंवले के वृक्ष पर निवास करते हज  इसलिए इस वृक्ष की पूजा की जाती है । आंवले का फल भगवान विष्णु को अति प्रिय है इसलिए इस वृक्ष में सभी देवी देवताओं का वास होता है
और आयुर्वेद में भी इस इसके फल को आयु वृद्धि करने वाला अमृत रूपी फल माना जाता है इसलिए इसका विशेष महत्व बताया गया है । इसकी पूजा से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है एवं अक्षय पुण्य की प्राप्ति भी होती है  इस दिन स्नान दान की परंपरा है ।


आज खरसिया में श्री गायत्री शक्तिपीठ मंदिर प्रांगण में आंवले के वृक्ष के नीचे महिलाओं द्वारा विशेष पूजा अर्चना की गई एवं विभिन्न तरह के भोग लगाए गए। आज के विशेष दिन रीति के अनुसार ब्राह्मणों को भोग लगाया गया एवं सभी को विशेष भोजन भी कराया गया ।

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