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🌲 जंगल नहीं कट रहे, उन्हें बेरहमी से मार दिया जा रहा है… और कातिल है – अदानी! 🌲
जहाँ पहले हर पेड़ से जीवन झाँकता था, आज वहाँ सिर्फ मशीनों की गूँज है।
छत्तीसगढ़ के मुड़गांव में आज नदियाँ भी सहमी हैं, क्योंकि
अदानी का कारोबार अब कुदरत के शवों पर खड़ा हो रहा है।
🔥 “तरक्की” के नाम पर तबाही की इबारत
पेड़ों की जगह अब धूल है
पक्षियों की जगह अब शोर है
बच्चों की हँसी की जगह अब सन्नाटा है
मुड़गांव अब गाँव नहीं, श्मशान बनता जा रहा है — जहाँ हर सूखी टहनी इंसाफ की माँग करती है।
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😡 लोगों की आह – जो अदानी के मुनाफे में नहीं गिनी जाती:
> “हमारे पेड़ काटे गए,
हमारी जमीन छीनी गई,
हमारे सपनों को रौंद दिया गया –
और दिल्ली-मुंबई के एसी दफ्तरों में इसे ‘विकास’ कहा गया!”
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🩶 कटाक्ष की आग – जो धुएँ से भी घनी है:
> “जिस जंगल में हमारी रोटी उगती थी, वहाँ अब अदानी की मशीनें हमारी लाशें खोद रही हैं।”
“पेड़ कटने से धूप नहीं बढ़ी,
बढ़ी है भूख, बेबसी और बर्बादी —
और उस पर साइन है अदानी का।”
“ये सिर्फ जंगल नहीं थे,
ये हमारी माँ की गोद थी —
जिसे अदानी ने बलात्कार की तरह रौंद दिया।”
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🩸 अब वक्त है कहने का
“अगर जंगल कटते रहे और हम चुप रहे,
तो एक दिन हमारी आवाज़ भी पेड़ों के साथ मिट्टी में मिल जाएगी!”
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