जिला न्यायालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल – वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन
निवाड़ी, भोपाल | संवाददाता – अरविंद अनुरागी
जिला एवं अपर सत्र न्यायालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ग्वालियर स्थित दाता बंदी छोड़ साहिब गुरुद्वारा के सौजन्य से बृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अपर जिला एवं प्रथम सत्र न्यायाधीश सतीश चन्द्र गुप्ता, द्वितीय सत्र न्यायाधीश रविप्रकाश जैन, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती सोनम वर्मा और मनीष छापरिया द्वारा पौधारोपण कर की गई।
इस दौरान न्यायाधीश सतीश चन्द्र गुप्ता ने कहा, “प्रकृति की अनुपम सौगात वृक्षों पर ही मानव जीवन निर्भर है। ये न केवल शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।” उन्होंने बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच वृक्षारोपण को एक सरल लेकिन प्रभावी समाधान बताया।
कार्यक्रम में पीपल, नीम, गुलमोहर समेत छायादार व फलदार पौधे रोपित किए गए। इस पहल का उद्देश्य न्यायालय परिसर को हराभरा, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनम वर्मा ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घर, कार्यालय और सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण करें और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के अंत में भाजपा विधि प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मेन्द्र निर्मल ने सभी उपस्थितजनों को यह संकल्प दिलाया कि केवल पौधे ही नहीं लगाएंगे, बल्कि उनकी देखरेख कर उन्हें वृक्ष बनने तक संजीवनी प्रदान करेंगे। उन्होंने अपील की कि “हर व्यक्ति एक पौधा अपनी माँ के नाम जरूर लगाए।”
इस अवसर पर अधिवक्ता संघ जिलाध्यक्ष शीलप्रकाश रावत, सचिव अनुराग नायक, आशीष यादव, इंजीनियर धर्मेन्द्र चौबे, डिप्टी रेंजर यूसुफ खां, पी. एल. अहिरवार, ओ. पी. खरे, कोषाध्यक्ष मोहन यादव, सहसचिव गोपाल कुशवाहा सहित यूथ आइडल कवि विवेक भास्कर ने भी वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
यह कार्यक्रम न केवल न्यायालय परिसर को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है, बल्कि समाज के प्रति पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी प्रतीक है.
जिला न्यायालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल – वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन













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